रामायण भाग - 16
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हनुमान जी से भेंट (दोहा - छंद)
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विप्र रूप हनुमत धरे, प्रभु को किया प्रणाम।
प्रभु की छवि है ह्रदय में, मुख पर प्रभु का नाम।।
राम लखन को ले चले, पवन पुत्र हनुमान।
हाथ जोड़ वानर खड़े, करते प्रभु का मान ।।
करी भेंट सुग्रीव से, नमन किया श्री राम।
बाली को पहुँचा दिया, प्रभु जी ने निज धाम।।
सिंघासन सुग्रीव को, बिठा दिया श्री राम।
राज्य मिला सुग्रीव को, सफल हुए सब काम।।
Uma Vaishnav
मौलिक और स्वरचित