लेखक है संकुचित सोच न रखें मैने आपपर व्यक्तिगत नही लिखा | यह पूरे आधुनिक समाज में उपजी पुरूषवर्ग के सोच का प्रत्युत्तर है | यदि प्रश्न समाजिक मानसिकता मे परिवर्तन का केन्द्रबिन्दु हो तो उत्तर देना कलमकार का कर्तव्य है |
कई बार गंभीर मुद्दे हास परिहास की चादर ओढ़े धीरे से समाजिक सोच को खरोज जाते है | वैसे स्वंय भी अनदेखा करने की कोशिश ही करती हूँ ,फिलहाल अब दिशाहीन समाज मे आईना लेकर दौड़ना , मुझे स्वंय उलझन नही भाती |🙏