सोचता हूँ
बदला तो क्या बदला!
वही आकाश है,वही मिट्टी है
वही पहाड़,वही मैदान
वही समुद्र खारा जल,
वही विद्यालय, वही ज्ञान का जाल
वैसी ही आवाजाही है विद्यार्थियों की,
इलेक्ट्रान अपनी कक्षा में हैं
प्रोटान, न्यूट्रॉन अपने स्थान पर हैं
गुरुत्वाकर्षण भी नहीं बदला है।
* महेश रौतेला