कुछ पुराना छोड़ दूँ
फटा,चिथड़ा हुआ,
फेंक दूँ,
उस शव को जला दूँ
जो बदबूदार होने को है,
कुछ नया रख लूँ
जो चिणुक सा छिपा है
अगली आग के लिये,
पुरानी राख में भी
एक चिणुक बचा है
जो आग बन हमें धधकायेगा,
और खोयी गाय की तरह
दूर तक हमें निहारता रहेगा।
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महेश रौतेला
०७.०५.१५