ख्वाब तेरे मेरे।
जो देखे थे बिछड़ने से पहले
हमने अपनी अपनी आंखों के दरमियां।
कुछ तूने कुछ मैने।
ख्वाब तेरे मेरे।
ख्वाब एक दूजे से
मिलने का और दूर तलक साथ निभाने का।
चलते चलते इसी सवाब में कुछ दूर कही और चले जाने का।
ख्वाब था।
बेसुध होकर नाचने का गाने का जिदंगी को जश्न बनाने का।
ख्वाब था।
तू तेरा तुम अबे चल , या फिर नाम करण करके बात करना ,
और इत्यादि।
ऐसे शब्दों का समायोजन। इनसे बनी एक कहानी अधूरी रह गई।
आप आप कहकर मर्यादा में ही ये सब पूरी हो गई।
एक ख्वाब था।
तुम्हारे अधरो से मेरे घर की दीवारों पर टकराती एक आवाज एजी सुनते हो
बस ख्वाब था।
सच कहूं फेहरिस्त लंबी है जैसे किसी नए बसे परिवार की पहली ट्रिप के लिए खरीदी करना हो।
लेकिन खैर। फिर कभी।
तुम किसी किरदार की भांति
मैं उसका दर्शक था।
तुम जैसे किरदार को छूना,या फिर असलियत में निहारना
उसके पीछे मेरा प्रयास भर्षक था।
कुछ देर लगा ख्वाब से बाहर आ गया।
जब तालिया बजने लगी।
तो मैं भी जाग गया।
और सोचा कि सब ख्वाब था।
साला ये सपना वैसे लाजवाब था।
एक ख्वाब था।
आनंद त्रिपाठी।