पंख
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ख्वाहिशों को चलो,
थोड़ा और बढ़ाते हैं।
उम्मीदों को लिये,
अपने पंख फैलाते है।
जिंदगी के ग़म को,
थोड़ा दूर भागते हैं।
कोई प्यारी सी ,
धुन गुनगुनाते हैं।
प्रेम के दीपक,
फिर से जलाते हैं।
इस तरह से हम ,
चलो पंख फैला है।
Uma Vaishnav
मौलिक और स्वरचित