एक बुंद इश्क
स्याही से भरि पन्नो की लिखावट का..
आज भी उसी तरह नया दिखाना लाजमी है,
तेरा पलके उठाके सामने से इशारे कारना..
आज भी लाजमी है,
अपनी उंगलीयो को हवा की तरह बालो मे ,
यु फसाना आज भी लाजमी है,
किताबो मे पुराने गुलाब की खुशबू की तरह
मेहेकना आज भी लाजमी है,
तेरी गुस्ताक शरारत को बचपना समझ ,
माफ करना आज भी लाजमी है,
तेरे हर एक निशानी को मोतियों मे पिरोना ,
आज भी लाज़मी है,
अपने लफ़्जो से तेरी हर एक बात को
मनाना आज भी लाज़मी है,
समुन्दर की तरह इस गहराई मे आज भी
तेरा एक बुंद इश्क़ लाज़मी है........!
Piyu