जानकी: तू तो वैसे ही काम में अटका पड़ा होता है। पर एक बात बता कभी अकेला महसूस नहीं करते क्या ?!
बिट्टू : करता हूं !
जानकी: तो खुद को केसे संभालते हो ?
बिट्टू: खुद को कसकर पकड़ के।
जानकी: क्या ? ऐसे केसे हो जाता है ?! पागल हो क्या ?
बिट्टू: मां ने कहा था, "बेटा! कभी लड़खड़ा जाओ और कोई संभालने वाला ना हो तो, अपने दोनो हाथों से खुद को कस कर पकड़ लेना। तुम्हारे ये प्यारे से हाथ ममा के ही है।" चलो अब मुझे काम है।
बिट्टू (सोचता है): ममा ! आपकी बहोत याद आती है। 🙁😟🥺 😞
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