अगर पैसों की थोकड़ी से आप को ठंडक या सुकुन का एहसास हो रहा है,
तो वो पैसे आपके पास टिकने वाले ही नहीं है।
बिना पैसो के आपका कोई महत्व नहीं।
अगर पैसों की थोकड़ी से आप में गरमी आ रही है,
तो वो पैसे आपके पास सिर्फ पड़े रहेंगे।
वो थोकड़ी किसी काम की नहीं।
ऐसा धन जो किसी काम में नहीं आता वह व्यर्थ जाता है।
- बिट्टू श्री दार्शनिक
(आचार्य जिज्ञासु चौहान)
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