वेद वाणी 6-53-3
अदित्सन्तं चिदाघृणे पूषन्दानाय चोदय पणेश्चिद्वि म्रदा मनः॥ ऋग्वेद ६-५३-३॥
हे प्रकाशमान परमेश्वर, जो परहित के कार्य करते है उनका व्यवहार विनम्र एवं मधुर हो और वें परहित का कार्य अधिक से अधिक करें, और जो परहित के कार्य नही करते है, उन को भी आप परहित का कार्य करने वाला बनायें।
O illumining God, let those who do charity acts be polite and sweet, and they should do more and more work of charity, and those who do not do charity work, make them also those who do charity work.