वो गांव की सीदी सादी लड़की ,शहर में
शहर के अनुरूप ढल गई
जो कभी एक दिन घर बाहर नही रही,
वो गांव से शहर में रम गई
जो गांव किसी लड़के से बोला भी नहीं करती थी
आज वो शहर में दो लडको से पट गई
पापा पापा कहते कहते जिसके दिन की शुरुआत होती थी
आज वो बाबू बाबू कहते कहते रह गई
जिसको भेजा था पढ़ने शहर
आज वो लड़की आवारगी में रह गई
जो गांव में कहती थी शहर जाकर पढ़ाई करूंगी
आज वो पढ़ाई से दूर हो गई
-Prahlad Pk Verma