वैलेंटाइन डे महज दो प्रेमी जोड़ों के लिए नहीं है... ये प्रतिक है प्रेम का।वास्तविकता तो ये है कि ये दिन प्रेम और भाईचारे का है पर समय के साथ इस दिन ने अपने असली महत्व को खो दिया और आज ये दिन बस दो लोगों के प्यार की निशानी बन कर रह गया। वास्तव मैं सेंट वैलेंटाइन ने अपनी जिन्दगी दाव पर लगा दी मानव जाति को प्रेम और भाईचारे से रखने के लिए। उनका केवल एक ही मकसद था की सभी इंसान आपस मे मिल जुल के रहे...आपस में न लड़े...युद्ध का अंत हो और इंसानियत कि जीत हो।जब इंसान की जान से ज्यादा कीमत जमीनों और रियासतो की थी उस वक़्त इंसानों को अपनी कीमत समझाई इस महान आदमी ने। अफसोस हमारी देश की नई पीढी ने इस प्रेम के प्रतिक त्यौहार को ही अपनी संकुचित सोच से दूषित कर दिया है।
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