आज लेके बैठा हिसाब आंसुओ का,
फिर भी दो आंसुओ का हिसाब न मिल सका...
टूट ही गया था तब पूरी तरहा,
जब तू दामन थामे खड़ी थी किसी और का...
रोक नही सका था आंसु को मेरे,
जो तेरे लिए कुरबान था...
मेरी वफ़ा चिल्लाती रही,
पर तेरी बेवफाई खामोश थी...
आज टुकड़ा टुकड़ा समेट के खड़ा हूं,
याद करके तूझे, आज फिर रो दिया......