यही तो दुखद बात है
कि वृक्ष सुन्दर कट गये
पहाड़ अखण्ड टूट गये,
पलायन की मार से
यौवन सब बिखर गये।
आदि सर्वज्ञ शक्ति में
आस्था अविभाज्य है,
जो बीज यहाँ पड़ गये
वे विशाल हो गये।
मार्ग में धुंध है
कठिन तप अभीष्ट है,
कपकपाती ठंड है
पर आस्था सजीव है।
जो महान उसने रच दिया
वही तो सुखद है
आदि से अन्त तक
विशेष ही विशेष है।
नक्षत्र का डूबना
विधि का विधान है,
सुखद इस प्रभात में
नहीं तम कहीं व्याप्त है।
* महेश रौतेला