मां दुर्गा
हे मां दुर्गा महारानी तेरे द्वारे आई हूं।
हे मां अष्ट भुजा धारिणी तेरी भक्ति करने आई हूं ।
ना जाने हम पूजा अर्चना और ना
विधि विधान मां दुर्गा भवानी ।
पूजन अर्चन और विधि विधान बतला
दो मां दुर्गा महारानी।
तू ही रक्षक मां महामाया महारानी।
करो पाप का भक्षण मां दुर्गा भवानी।
आओ धरा पर सिंह पर सवार होकर
मां महामाया महारानी ।
जय जय मां दुर्गा भवानी।
हे अष्ट भुजा धारिणी महिषासुर मर्दिनी
माता रानी।
अस्त्र शस्त्र धारिणी भयंकरी रक्त बीज विनाशिनी महारानी ।
लाल फूलों के हार पहनाएं मां भवानी।
धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित करें मां
महारानी ।
तेरे चरणों में शीश नवाएं माता रानी।
तेरी आरती करें मां दुर्गा महारानी।
तेरी महिमा बड़ी अपरंपार मां महामाया महारानी।
करो कृपा मां अष्ट भुजा धारिणी महिषासुर मर्दिनी महारानी।
जब जब पाप बढ़े धरती पर तुमने
भू का भार हरण किया ।
भक्तो की विपदाओं को दूर कर
कल्याण किया।
अब तो आस तुम्हारी ही है मां।
यदि तेरी कृपा हो जाए तो
जीवन नैया पार हो जाए।
दीन दुखियों के दर्द हरकर
जन जन का उद्धार करो।
मैया जी संकट मुक्त करो ।
भव बाधा हरो ।
जीवन को उबार दो मां।
संसार की पतवार मां तुम।
संसार को उबार दो मां।
प्रेम भाव से पूरित वतन हो मां।
ऐसा तुम अब वरदान दो ।
ना रहे कोई दुःखी और ना हो भिखारी।
कर कृपा मां दुर्गा हो सभी सुखारी ।
ऋण मुक्ति दो मां ।
जीवन सुखी हो मां।
शत्रु बुद्धि विनाश करो मां।
शत्रु बुद्धि पर विजय हो मां।
संतानों को सुरक्षित करो मां ।
अनिता कहे अब जीवन में सुख शांति दो मां।
नवल उत्थान हो मां।
कोटि-कोटि प्रणाम मां दुर्गा महारानी।
तेरी जय हो मां तेरी जय होवे मां।