अविश्वसनीय
जब अचानक कोई अनहोनी हो जाती है तो
बातें अविश्वसनीय रूप ले लेती है। जितने मुंह
उतनी बातें करते हैं लोग। बातों को समझने
और समझाने में ही लोग वक्त लगा देते हैं।
अब कौन माथा मारी करे। लोग हार कर
किनारा कर लेते हैं। फिर अविश्वसनीय बातें
जहां से शुरू हुई वहीं खत्म हो गई।
अनिता सिन्हा✍️
दिनांक ३.१२.२०२१
विश्वास ही नहीं होता
विश्वास ही नहीं होता है कि श्याम इस तरह की गिरी
हुई हरकत कर सकता है। भरे समाज में मुंह पर
कीचड़ उछाल आया । मेरी तो नाक कट गई । अब
क्या करें , कुछ नहीं कर सकते हैं। अफवाहें तो
उठेगी परन्तु सफाई देने से व्यक्ति बात नहीं बनेगी।
समय सबसे बड़ा इलाज होता है हर मर्ज का । अब
श्याम को जरुरी हिदायतें देकर ऐहतियात बरतने को
कह दिया जाएगा कि आगे से कोई भी गलत हरकत
न करे।
अनिता सिन्हा ✍️
दिनांक ५ दिसंबर २०२१.
यह रचना बिल्कुल काल्पनिक है इसका किसी भी तरह से कोई भी लेना देना नहीं है लेखक जिम्मेदार नहीं हैं।
जय जय श्री सहस्त्रबाहु नारायण कोटि-कोटि प्रणाम।
मां सरस्वती वंदना ।✍️
ज्ञान का भंडार दे मां शारदे।
ज्ञान का प्रकाश दे मां शारदे।
ज्ञान गंगा बहा दे मां शारदे।
गंगा जल सम निर्मल मन दे मां शारदे।
जय जय मां शारदे।
ज्ञान की ज्योति जला दे मां शारदे।
ज्ञान भक्ति से ओत-प्रोत रहें मां शारदे।
तम हरो मां शारदे।
जीवन में उजाले हो मां शारदे।
जय जय मां शारदे।
संगीत का ज्ञान दे मां शारदे।
संगीत का वरदान दो मां शारदे।
संगीत की अधिष्ठात्री देवी मां शारदे।
संगीत सुहासिनी मां शारदे।
जय जय मां शारदे।
कोटि-कोटि प्रणाम मां शारदे।
अनिता सिन्हा ✍️
जय जय श्री सहस्त्रबाहु नारायण कोटि-कोटि
प्रणाम।