जब पहली बार उसने अपने,
नन्हे-नन्हे हाथ से मेरा हाथ थामा था,
जब चलना शिखा तो उसके,
नन्हे-नन्हे पाँव मेरी ऊँगली पकड़कर चले थे,
जब कोई भी चीज़ लेनी हो तो,
आके मेरे सामने मुंह फुलाकर बैठ जाती थी,
देखते हीं देखते कब मेरी छोटी सी,
गुड़िया रानी बड़ी सयानी हो गई,
आज मेरी छूटकी मुझसे भी,
बड़ी और समझदार हो गई।