कुछ उतार चढाव खोजती उंगलियां
गरदन से नीचे कि और सरके जा रही थी
कुछ अनकही कल्पनाए थी उसे जो पूरी करनी थी
क्या मैं ?
वो पहली आसमानी छूअन होने से पहले चंद स्वर कानों मे थे पड़े
हाँ, हा, तुम
मे फुसफुसाई थी और खो गई थी
उस मीठी सी अगन मे
डूब गई थी
उस जलते समुन्दर मे,
उन बारिक कपड़ो के परदो से धके हिस्सों मे
कुछ इस कदर घुले के
कहाँ मे खत्म कहा वो शुरू हो पता ना हि ना चलें
मानो बंध आँखों मे और सीसकति सांसो मे हि पुरि दुनिया बसाई हो
सांसो कि कमी से अधर थके
बस दो जिस्मो ने लिखी गजल उम्रभर कि
जैसे सीने मे दबा हुआ राज़ पढ़ा गया
आँखों के आगे से सब धुंधला गया
कमरे कि हर चीज़ मे सीसकियो ने एक धुन भर दी और सांसें हो के मलंग नाचने लगी
दो जिस्म बने केनवास और जिह्वा चित्रकारी कि उत्तम परिभाषा देखाने लगी
शायद दुनिया कि नज़र मे ये पाप था
तभी मे नर्क कि आग मे जलने लगी
हा मे तो अनजान थी इस दुनिया से हि
इस मीठी सी जलन से हि
तभी फिर से कुछ फुसफुसाहट हुई
अगर मेरे पास एक हि ज़िन्दगी है तो मे ऐसे हि सारी ज़िन्दगी जीना चाहता हूँ
बस तुम्हारे साथ
और उन बाहों के घेरो मे
खो गई मैं फीर से