कच्ची उम्र में बनते रिश्ते,
नये-नये प्यार के रंग में जुडते सपने,
ना समझ इन्सान नहीं मानते,
ये प्यार नहीं आकर्षण के नखरे,
पढाई लिखाई के चक्कर से निकले,
चल पड़े प्यार,इश्क़,मोहब्बत के रास्ते,
झूठे-मुठे वादे,हँसी-आँसू रोज़ की बातें,
नादान परिंदे ना समझे ये प्रेम रोग नाते।