अनजान सफ़र में अज़नबी लोग,
अनजान रास्ते में अनदेखी मंजिल,
ना रास्ते का पता ना मंजिल का ठिकाना,
सुनसान राह में चल पड़ा मैं अकेला,
अंधेरी गलियों में बेजान सा रास्ता,
अनसुने आवाजों का मच रहा है शोर,
डरावनी अमावस की काली रात का साया,
डरता है इन्सान और भटकता है रास्ता।