थोड़ा सोचूँ फिर एक बात लिखूँ ,
जज़्बात लिखूँ या हालत लिखूँ..
तेरे इश्क़ को अपने साथ लिखूँ ,
या मेरे हाथों में तेरा हाथ लिखूँ..
तुम्हें देखूँ फिर तेरी बात लिखूँ ,
तारीफ़ लिखूँ या फ़रियाद लिखूँ..
तेरे पीछे ख़ुद को आबाद लिखूँ ,
या तन्हाई में ख़ुद को बर्बाद लिखूँ..
तुम्हें दिन या ख़ुद को रात लिखूँ ,
कुछ तो
बता आज कौनसी बात लिखूँ..
या फिर
आज के बाद कुछ भी ना लिखूँ..