मैं बे फिक्र था तुम्हारे आँचल में माँ....
तुम्ही मेरी दुनियाँ तुम्हीं मेरा आसमाँ....
तेरी थपकी से नींद आंखों में समाती
ख्वाबो में परियाँ आ मुझसे बतलाती।
अच्छी लगती हो तुम हँसते हुए माँ...
तुम्हीं मेरी दुनियाँ तुम्हीं मेरा आसमाँ.........
एक रोटी का टुकड़ा हिस्से थे चार।
थोड़ा नमक था और थोड़ा अचार
सब को खिला के खुद सो गई थी
आंखों में रात बीती सुबह हो गयी थी।
देखा है तुमको अश्क़ छुपाते हुए माँ...
तुम्हीं मेरी दुनियाँ तुम्हीं मेरा आसमाँ......
न कोई जाति न कोई धर्म है तुम्हारा
तुम जननी हो प्रिय है आँचल तुम्हारा।
ये दुनियाँ ये जमाना तुम्हे नकारता है
मगर दर्द में हो इंसा तो माँ पुकारता है।
देखा है ईश्वर को भी सिर झुकाते हुए माँ....
तुम्हीं मेरी दुनियाँ तुम्ही मेरा आसमाँ .....