Hindi Quote in Thought by Sudhir Srivastava

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लेख
प्लास्टिक से मुक्ति कैसे संभव?
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प्लास्टिक जहाँ सुविधा जनक है, वहीं अत्यंत खतरनाक भी है। बढ़ती बीमारियां, प्रदूषण और धरती की उर्वरा शक्ति को नष्ट करने के अलावा, जहरीले रसायन और छुटा जानवरों ही नहीं मानव के जीवन को भी खतरे में डालने का काम प्लास्टिक कर रहा है। सुविधा जनक और सस्ता होने के कारण इसकी उपयोगिता भी बढ़ी है।
सरकार द्वारा इसकी रोक की दिशा में कुछेक प्रयास जरूर हो रहे हैं, परंतु वे भी नाकाफी तो हैं ही,बढ़ती निर्भरता और भरपूर तात्कालिक विकल्प न होने से प्लास्टिक पर पूरी तरह प्रतिबंध संभव भी नहीं है।
परंतु असंभव कुछ भी नहीं है।बस इच्छाशक्ति की जरूरत है।लेकिन ये इच्छाशक्ति केवल सरकार या व्यक्ति के तौर पर नहीं बल्कि सामूहिकता के साथ होने पर ही संभव है।
जहाँ व्यक्ति के तौर पर हम दैनिक जीवन में इससे बचने का संकल्प लें,परिवार और समाज के रूप में निजी व सार्वजनिक समारोहों में इसकी निर्भरता धीरे कम करते चलें या पूरी तरह बचने की कोशिशें करें।पेडो़ के पत्तों,मिट्टी के बर्तनों और अन्य नष्ट होने वाली सामग्रियों, संशाधनों को बढ़ावा दें।जैसा कि पहले बड़े बड़े आयोजन दोना पत्तल, कुल्हड़ के उपयोग से संपन्न हो जाया करते थे,इससे स्थानीय और घरेलू स्तर पर रोजगार बढ़ेगा ही, प्रदूषण और अन्य समस्याओं का डर भी नहीं रहेगा।
सरकार को भी चरणबद्ध ढंग से इसके विकल्पों की उपलब्धता के साथ सख्ती से दृढ़तापूर्वक कदम उठाना चाहिए।तभी प्लास्टिक से मुक्ति संभव है। क्योंकि किसी भी गँभीर समस्या का सरल और सर्वमान्य हल संभव नहीं है। कुछेक लोगों को इसका नुकसान भी होगा, लेकिन वह अपवाद जैसा ही होगा, परंतु अधिक से अधिक और सामाजिक ही नहीं राष्ट्र के स्तर पर थोड़े ही दिनों में प्लास्टिक मुक्त जीवन का प्रभाव सबको आश्चर्य में भी डाल देगा। तब सभी इससे बचने के लिए स्वयं आगे आगे चलने लगेंगे और फिर से प्लास्टिक से मुक्ति स्वमेव ही संभव हो जायेगी।
◆ सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा, उ.प्र.
8115295921
©मौलिक, स्वरचित
20.08.2021

Hindi Thought by Sudhir Srivastava : 111744469
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