जीवन ऐसा हो
युद्ध नही शांति, घृणा नही प्रेम
विध्वंस नही सृजन
लाएगा राष्ट्र में नया परिवर्तन
युवा आगे आए और लाए
कर्म और श्रम की बहारें।
युद्ध और आतंकवाद की विभीषिका,
कर रही है धन की बर्बादी
माँ से छीन रही है बेटा,
बहिन से उसका भाई
और पत्नी से उसका सौभाग्य।
शहीदों की विधवाओं को
दिया जा रहा है सम्मान,
क्या इससे मिल जाएगा
उनका बिछुडा हुआ अपना
जीवन का देखा हुआ सपना
सांप्रदायिकता और वैमनस्यता की जगह
आर्थिक क्रांति लाए।
बेरोजगारी का कलंक मिटाएं
स्वरोजगार की ध्वजा फहराए
एकता और सहयोग की मशाल उठाए
देश को उसका गौरव दिलवाए और
घर घर में सद्भावों के दीप जलाए।