गीत
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क्या लेकर आए दुनिया में
क्या दुनिया से लेकर जाना
भीष्म पितामह से अच्छा है
अभिमन्यु होकर मर जाना !!
बहुत बड़े योद्धा थे लेकिन
सौगंधों पर अड़े हुए थे
इसीलिए तो युद्ध क्षेत्र में
शर शैय्या पर पड़े हुए थे
किसने देखा नहीं कष्ट में
बार बार आँखें भर जाना !!
भीष्म पितामह से अच्छा है
अभिमन्यु होकर मर जाना !!
जितने थे वरदान समय पर
कभी कोई सा काम न आया
था ऐसा अपराध कौन सा
जो उनपर इल्ज़ाम न आया
हर चुप्पी का मोल चुकाया
सांसों का भर कर जुर्माना !!
भीष्म पितामह से अच्छा है
अभिमन्यु होकर मर जाना !!
इच्छा मृत्यु का वर पाकर
कहां कौन सा तीर चलाया
उनसे बढ़कर तो बालक ने
बचपन में ही नाम कमाया
उस बालक से सीखा होता
जग में नाम अमर कर जाना
भीष्म पितामह से अच्छा है
अभिमन्यु होकर मर जाना !!
हाथ पसारे ही जाने की
युगों पुरानी परंपरा है
फिर भी इस दौलत से सबका
घट रीता है नहीं भरा है
सबकी क़िस्मत में लिक्खा है
अपनी पीड़ा सहकर जाना !!
भीष्म पितामह से अच्छा है
अभिमन्यु होकर मर जाना !!
जितनी जिसको उम्र मिली है
वो उतनी ही पीर सहेगा
जितना गीतों में वाजिब है
उतना ही गुनवीर कहेगा
क्यों सारी दुनिया की पीड़ा
इन कंधों पर ढोकर जाना ?
भीष्म पितामह से अच्छा है
अभिमन्यु होकर मर जाना !!