जब से जन्मी हू मैं
किसी ऐसे व्यक्तित्व से मिलना चाहती थी
जिसको देखते ही लगे
इसी से तो मिलना था
पिछ्ले कई जन्मों से
एक ऐसा व्यक्तित्व जिसे पाकर
यह देह रोज ही जन्मे और रोज ही मरे
क्योंकि मुद्दतों से
मेरे सीने में भर गया था अपार मर्म
मैं जानना चाहती थी
कैसा होता है
मन की सुंदरता का मानसरोवर
जिसे देखते ही जल जाए आँखों में लौ
और लगे कि दिया लेकर खोजने से भी
नहीं मिलेगा धरती पर ऐसा मनुष्य
बहुत दिनों से मैं
किसी ऐसे आदमी से मिलना चाहती थी
जिसे देखते ही लगे
करोड़ों जन्मों के पाप मीट गए
कट गए सारे बंधन
की मोक्ष मिल गया इसी काया मे!!