शीर्षक: दुनियादारी
दुनियादारी, बहुत समझने वाली चीज होती
समझ गए इसे, तो हर जगह जीत ही होती
व्यवहार शब्द में हमारा, किरदार छिपा होता
क्या है हम ? इसी से मूल्य-दान पाया जाता
मधुरता चेहरे की, बहुत कुछ, गलत छुपा लेती
आँखों मे छिपी चालाकी, बाहर नहीं झांक पाती
सफलता के कई सोपान, जिसमें एक है, मुस्कान
कठिन राह का सफर भी हो जाता, सरल व आसान
कुछ नहीं दुनियादारी, एक फ़लसफ़ा जीत का है
लेन-देन की दुनिया मे, किस्सा यह एक रीत का है
हकीकत, यहां कोई किसी को कुछ नहीं देता, लेता
रिश्तों के खास होने के विश्वास को, आश्वासन देता
जीत दुनिया मे जरुरी होती, तभी सफलता कहलाती
महत्वपूर्ण हो जाये, तो फिर मंजिले आसान हो जाती
✍️ कमल भंसाली