शुभकामनाएं:
दूर से शुभकामनाएं आती हैं
कुछ ठिठुर- ठिठुर कर,
कुछ हँसते,कुछ इठलाते
कुछ मुस्कुरा कर थपथपा जाती हैं।
उतनी दूर से
बधाई आती है,
जगमगाती, टिमटिमाती,
शीतल चाँदनी सी फैली,
गुनगुनी धूप सी बिछी,
जो मुझे प्यार के मोड़ पर खड़ा कर जाती है।
शुभकामनाएं आती हैं
चलकर नहीं, उड़कर,
चमकती हैं, बरसती हैं
जैसे दूर कहीं वर्षा होती है,
मन के पास ठहर
उसे हरा-भरा कर जाती हैं।
** महेश रौतेला