दिल की तन्हाइयों से घायल में भी हूँ।
इश्क़ की रुस्वाइयों से में भी घायल हूँ।।
तुम्हें पाने की हसरत है वजह ज़िंदा हूँ।
ख्वाब की परछाइयों से घायल में भी हूँ।।
इश्क़ में हासिल हुए तन्हाइके मंझर।
दर्द की गहराइयों से घायल में भी हूँ।।
हसरतों ने छीन लिये जिंदगी के मलाल।
बहारों की बेवफाइयों से घायल में भी हूँ।।
बेपनाह बेवजह दर्द हासिल हुए इश्क में ।
चाह की गहराइयों लें घायल में भी हूँ ।।
आयना भी तरस गया देख कर उनको।
हुश्न की अंगडाइयें से घायल में भी हूँ।।