बे-नाम सख्सियत और दिल गुम नाम है,
पहेचान मैरी फकत अल्फाज़ क्यूं नही है?
रुहे मस्त जिंदादिली, पुकार लेती है क्यूं?
आप में रुहाना नूर, क्या मालामाल नही है?
तुटती है सांसों की डोर , सजाऊं मैं कैसे
जुडना जिंदगी से ही , क्या कमाल नही है?
हसीन लम्हें खो दिए नादानियत में ही,
हाल ए दिल हुश्न , क्यूं खबरदार नही है ?
छुटती गई साहिल से कस्ती ,मजधार में
टुटते रहे जुडते रहे , क्यूं अहेसास नही है?
-મોહનભાઈ આનંદ