पथ"
( एक प्रार्थना, एक भावना)
हे, प्रभु
खड़ा रहूं, जिस पथ पर
वो हो साहस का
अड़ा रहूं, जिस पथ पर
वो हो अहिंसा का
बैठा रहूं, जिस पथ पर
वो हो शान्ति का
खाता हूं, जिस पथ पर
वो हो, स्वास्थ्य का
कर्म करुं जिस पथ पर
वो हो, समृद्धि का
देखूं जिस पथ को बार बार
वो हो, धर्म का
चलूं जिस पथ पर
वो हो, प्रेम का
ध्यान करुं जिस पथ पर
वो हो, ज्ञान का
बीमार रहूँ जिस पथ पर
वो हो, धैर्य का
साधना करुं, जिस पथ पर
वो हो, संयम का
याद आये जो पथ पर
वो हो, सिर्फ तुम
मरु जिस पथ पर
वो हो, मुक्ति का
"हे प्रभु" जिस पथ पर
तुम न हो
वो कभी "मेरा" न हो
रचियता: कमल भंसाली