#Kavyotsav2
कविता
जनसंख्या विस्फोट
हम नगर हैं,
कल महानगर बन जाईंगे।
खेत, खलिहान, जंगल
तीनों को निगल जाईंगे।।
चारों ओर होंगे
मकान ही मकान।
गगन चुम्बी भवनों के
प्रदूषित वियाबान।।
खेत नहीं होंगे
फिर खेती कहां होगी।
दाल नहीं होगी फिर
रोटी कहां होगी।।
आदमी बस आदमी को
खाए जाएगा।
ऐसा दिन दूर नहीं
जल्दी आएगा।।
Name:- Hari Charan Thakur
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