बेहतर
किस्सा क्यों बार बार याद आता है
अनकहे कई सवाल दाग़ जाता हैं।
डर लगता हैं जवाव कही जिंदगी को ना उलझा दे
अच्छी खासी जिंदगी में जहर न मिला दे।
खामोश रहना ही बेहतर...
अंधेरा क्यों बार बार घेर जाता हैं।
रोशनी की हर किरन को खा जाता हैं।
डर लगता है कही आगोश में हमे भी ना ले ले
धूलभरे दर्पण को और ज्यादा मैला न कर दे।
सहम जाना ही बेहतर...
तकलीफों से लड़ते जाते है।
हर बार जीत कर भी
एक नई मुश्किल सामने पाते हैं।
डर लगता है कही इनसे लड़ते लड़ते खुद से ही ना हार जाए ।
इस डगमगाती जिंदगी के दम पर कब तक लड़ते जाए?
हार जाना ही बेहतर...