न अधिक क्रोधी हूँ न अधिक कामी हूँ , न ही बहुत शोक है ,न अधिक मोह है न बहुत अभिमान है न ही अधिक मत्सर से पीड़ित हूँ , न इन सभी से मुक्त हूँ मै बस इतना जानती हूँ कि बस तेरी (परमात्मा) हूँ , और जब मै तेरी हूँ तो यह सब भी तेरा है , तू ही जान ,तू सम्भाल |
-Ruchi Dixit