आपसे बीछडे जमाना हो गया,
एक भुलासा फसाना हो गया।
हसरतों ने ख्वाब दिखलाये कइ,
प्यार का बीखरा तराना हो गया।
फुरकतों की आंच में जलते रहे,
दिल मेरा गमका निशाना हो गया।
जिंदगी की खुश खयाली आरजू,
ख्वाब अपना जो पुराना हो गया।
सारी उलफत की उमीदें धुल गइ,
फीर येअपना आजमाना हो गया।
फासले ऊसने बढाये इस कदर,
बोज फुरकत का उठाना हो गया।
युं रहा मासूम मुकदर भी खफा ,
बाहमी दुरी का निभाना हो गया ।
मासूम मोडासवी