तुमसे मिले हैं जब से, हालात अजीब लगते हैं, कुछ जज्बात अजीब लगते हैं, कुछ ख्यालात अजीब लगते हैं, क्योंकि मिलन की यह घड़ी प्यार कम ज्यादा रुसवाई है, न जाने क्यों इसमें चाहत और मिलन की भी लगती बुराई है, क्योंकि यह समय कोरोनावायरस की भेंट चढ़ गया है, हर इंसान ने आपस में दूरी बनाई है, जो कहते थे सदा हमें अपना आज उन्होंने ही हमसे ना मिलने की कसम खाई है..... ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़
तुमसे मिले हैं जब से हम बेचैनी और बेकरारी को महसूस करते हैं, दिल नहीं लगता जब तुम्हारे बिन, तो फिर फोन पर बात करते हैं➖ ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़