टूट गयी है माला
टूट गयी है माला
मोती बिखर चले
दो दिन रह कर साथ जाने
किधर चले टूट गयी है माला
मिलन की दुनिया छोड़ चले ये आज बिरह में सपने
खोए खोए नैनों में हैं उजड़े उजड़े सपन
व्याज की गठरी लिए झुकाये नजर चले
दो दिन रह कर साथ जाने किधर
अब तो यह जग में जियेंगे आँसू पीते पीते
जैसी इनपे बीति वैसी और किसी पे ना बीते
कोई मत पूछो इन्हें के यह किस डगर चले
दो दिन रह कर साथ जाने किधर चले
kavi Pradeep...