कहाँ जाओगे..........
हमसे पल्लू छुड़ाकर कहाँ जाओगे,
जिंदगी यूँ तबाह कर कहाँ जाओगे,
हम तो सागर हैं गहरे मिलेंगे यहीं।
खुद नदी बनके एक दिन चले आओगे।।
फूल गर तुम बनो, हम भी कांटे बनें,
तुमको छुए जो कोई, तो चुभ जाएंगे,
अपने पैरों की पायल न समझो हमे।
की तुम उतारोगे और हम उतर जाएँगे।।
इश्क़ हो तुम अदाओं से घायल करो,
बनके तलवार क्या प्यार कर पाओगे,
जिंदगी ने कई जख्म हमको दिए।
तुम हमे अब कहाँ घाव दे पाओगे।।
तुम चले जाओ जाना जरूरी जो हो,
देखतें हैं कहाँ तक पहुँच पाओगे,
में समय हूँ निरंतर जो चलता रहे।
वक़्त से आगे क्या तुम निकल पाओगे।।
साँथ दो तो सही तुम संवार जाओगे,
मेरा वादा है कि तुम निखर जाओगे,
यूँ मुहब्बत से तुमको संभालेंगे हम।
फूल की तरह तुम भी महक जाओगे।।