“काँच की तरह चूर हुआ हूँ पहली बार,
मैं इतना मजबूर हुआ हूँ पहली बार।
अपने घर से दूर रहा हूँ बरसों मैं,
लेकिन ख़ुद से दूर हुआ हूँ पहली बार।
अंदर की बिनाई *भी तो रूठ गई,
इतना तो बेनूर*हुआ हूँ पहली बार।
बिनाइ= વિણવું
बेनूर = બેઆબરૂ,બદનામ
दुनिया को तो कब था मैं मंजूर मगर,
ख़ुद को नामंजूर हुआ हूँ पहली बार।
घूर रहे हैं मुझको घर के आईने,
किस नश्शए *में चूर हुआ हूँ पहली बार।
नश्शए= નશ્વર, નાશવંત “