रूक जा पंछी इसी डाल पर
रात हुयी, अब गहन तिमिर है।
अभिमन्यु को चक्रव्यूह में
घेरेंगे यहाँ सात महारथी।
न्याय नहीं अन्याय बड़ा हो
कहता है बड़ी कहानी।
सत्य नहीं असत्य बड़ा हो
काट रहा युग की थाती।
कह दे अपने प्यार के किस्से
डाल हरी है, यही वसंत है।
इस तिमिर में उड़ न सकेगा
यहीं दिल में इक दीप जला ले।
* महेश रौतेला