पूर्णिमा का चंद्र खिला है, रात है सुहानी आज, पर तु आया नही कन्हाई
तेरे बिना चारो तरफ छाई है उदासी, कटे कटती नहीं यह तन्हाई ।
इतने रंग है चारों ओर, पर फीकी है फ़िज़ा तुझ बिन ओ हरजाई ।
याद सताये तेरी दिन रात, यूह छुपके, रुला न मुझे; मैं तो हु तेरी परछाई।
होली आयी रे कन्हाई, रंग फ़िके न पड़ जाए, पकड़ ले मेरी कलाई।
आजा ओ श्याम सलोने, रंग भर दे, कोरा तन मन ले के राधिका तोरे द्वार है आई
Armin Dutia Motashaw