चंडीगढ़ में छः साल की बेटी के साथ निर्मम अपराध- हत्या
इतनी शिक्षा इतनी सुरक्षा, क्यों समझ नहीं आती है।
बहुत बार भेड़ियों के हाथों, बेटियां बलि चढ़ जाती है।
अबोध बचपन कहीं ना कहीं, रोज बलि चढ़ता जा रहा।
आँशु पूछ कर रह जाते माता-पिता, समझ कुछ नहीं आ रहा।
शहर की हर गली गली,जाने क्यों लगने लगी हत्यारी।
जैसी हर कोने में छुपा बैठा हो, कोई व्याभिचारी।
हुआ बलात हरण नन्हीं परी , नोच नोच कुकृत्य ने छोड़ा।
आज मेरे देश में एक बार फिर छः साल की बेटी ने दम तोड़ा।।
क्या कसूर था नन्हीं "श्रुति" का ,मेरा शहर बहुत शर्मिंदा है।
निर्मम भेड़िए हुए भगोड़े, वे हत्यारे अभी जिंदा है।।
क्यों सह देता कानून उन्हें, उन्हें गोली क्यों नहीं मारी जाती।
अपराध सामने दिख रहा, फिर भी हमदर्दी जताई जाती।।
शिकार हुई बेटियों को न्याय मिले ना मिले ,हत्यारे पहले बचाए जाते ।
बड़ी सिफारिशें होती उनकी, बड़े-बड़े वकील बचाने आ जाते।।
बार-बार एक ही बात पूछ कर, क्यों गवाही का तांडव होता।
क्यों नहीं दिया जाता दंड तुरंत ,न्याय पूछ पूछ कर रह जाता रोता।।
उनको भी सजा मिले जो, अपराधियों को बचाते हैं।
झूठे गवाह उपस्थित कर, गवाही उनकी दिलवातें हैं।।
अनेक हुए अपराध उदाहरण हैं ,अपराधियों को बचाया जाता।
न्याय मांगते परिजन रोते , वर्षों बीत जाते, न्याय नहीं मिल पाता।।
दुखते मन ने बात कही है, मन बेटी की पीड़ा में कायल है।
उचित न्याय करना मेरे "सविधान",हर पिता आज घायल है ।।
सबसे ऊपर "संविधान" हमारा जो उचित न्याय करता है।
सब को न्याय मिले समय पर, 'जुड़वाँ' मन से कहता है ।।