" फागुन "
मन क्यूं बहके इस मौसम में
ये कैसा नशा - सा छाया है
ये बोल पड़ी सारी दुनिया
फागुन का महीना आया है
अलसाई सी भरी जवानी
ये सारा जहां अलसाया है
टेसू गुलाब कचनार खिला
यह बूढ़ा आम बौराया है
ये बोल पड़ी सारी दुनिया
फागुन का महीना आया है
तरुणाई अब मदमस्त हुई
बूढ़ों का मन ललचाया है
हर रिश्ता अब देवर सा लगे
फागुन का महीना आया है
प्रेयसी लगे उपवन की हंसी
प्रियतम फागुन बन आया है
प्रेम का रस बरसे जग में
फागुन का महीना आया है
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