रिक्त हाथ ही आया था
रिक्त हाथ ही जाऊँगा,
चलते-चलते चुक जाऊँगा
उससे पहले जग जाऊँगा।
अचौल राह भी रह नहीं पाती
अचौल शब्द भी दुस्तर होते,
शब्दों से जो जीवन आता
गीत अमर कुछ उसके होते।
यह वसंत भी चुक जायेगा
यह यौवन भी छिप जायेगा,
तीन पग में सब नप जायेगा
कभी सुई भर न मिल पायेगा।
* महेश रौतेला