खुल चुका है ये राज की जिन्दगी भी होती है
छोड़ा तूने मुझको अब खुशी भी होती है
लोग जख्म को खोदते है यहां पर
जब मेरे गमो में कमी भी होती है
हर चीज का अपना मिजाज जहरीला है
दुश्मनी के दरवाजे दोस्ती भी खोलती है
कदमो की रफ्तार इतनी अच्छी नही सवनित
ये रेलगाड़ी कहीं पर खड़ी भी होती है