चित चोखा मन निरमला, बुधि उत्तम मति धीर।
सो धोखा नहिं बिरहहीं, सतगुरु मिले कबीर।। 3 ।।
कबीरजी कहते हैं कि जिन जिज्ञासु भक्तों को पूर्ण सद्गुरु मिल जाते हैं, उनका चित्त सुंदर, मन निर्मल हो जाता है और वे उत्तम बुद्धि वाले, धैर्यवान तथा साहसी बन जाते हैं। फिर वे कभी भी किसी कपट-प्रपंच में पड़कर धोखा नहीं खा सकते, वे सही निश्चय वाले बन जाते हैं। सद्गुरु की कृपा से ही इस भव सागर से पार उतरने का मार्ग मिल सकता है।
सत साहेब जी-
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