हुस्न के बाजार हम अकेले कया हुए
लोगो ने हमारा पीछा नहीं छोडा ।
मे भागती रहीं ओर वो लोग पीछा करते रहे।
ओर मनोमन मे मे उसे याद करती रहीं।
मेरी याद उसके मन तक पहोची की
मेरे दिल ने उसे के दिल को आने का फरमान दिया ।
वो दोडा मुजे बचाने के लिए ।
ओर मे दोडी अपने आपको बचाने के लिए ।
रास्ते मे क्या उसे मे टकराइ की
मेरे जान मे जान आई ।
मेने उसे देखा की चहेरे पर खुशी की लहेर छुटी
ओर उसके सारे गम खुशी बन गए ।