'धूप छांव सा'
चले राही पैर चले...
चली राह में कुछ छाया सी।
मिले राह में मीत मिले..
और मिली कुछ माया सी।
पानी पे चलती नाव सा
जीवन ये धूप छांव सा
मिला मुझे...!
कभी शहर कभी गांव सा
कभी शांत कभी शोर से
ग़िला मुझे...
जीवन हर रंग लिए
कभी अकेले कभी सभी के साथ
मिला मुझे..
-मिन्नी शर्मा