" अतित का दर्द "
बेरूखा प्यार आंखों से पानी बरसाता है ,
और बेजान दिल अतीत में खो जाता है ,
बहुत ही कम था उस वक्त और आज वह भी नहीं है,
जीने की आस आज नहीं जितनी उस वक्त शायद थी,
सोचता हूं मैं आज खयालों में खो कर ,
मैंने क्या पाया और क्या खोया ,
दिल ए हाल हम अपने जाकर किसे सुनाएं ,
क्योंकि उन्होंने ही अपना दामन छुड़ा लिया ।
उम्र की इस ढलान पर से सोचता है "मित्र" ,
भीगी पलकों से बहते आंसुओं का अब मतलब क्या है।
{✍️मनिष कुमार "मित्र" 🙏}