सुंदर काया छवि निराली है
न जाने कहा गुम हो जाते है
न्याय करत कैसे कुदरत है
दामन में यादें संभालत है
न खेल खेल दिलो के बन कर भोले भाले
मन निश्छल भोले अचरज मे पड़ जाते है
दामन न पूछो कब कैसे कितने भीग जाते है
न जाना अब जब आओ तो बस यही बस जाना है
- RJ krish... ✍️